menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ६२
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
पादौ प्रपीड्य कृष्णस्य राज्ञश्चापि जनार्दनः |  ३५   क
अभ्यवादय़दव्यग्रो गान्धारीं चापि केशवः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति