आदि पर्व  अध्याय ६३

वैशम्पाय़न उवाच

दूरस्थान्साय़कैः कांश्चिदभिनत्स नरर्षभः |  १६   क
अभ्याशमागतांश्चान्यान्खड्गेन निरकृन्तत ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति