अनुशासन पर्व  अध्याय ६३

नारद उवाच

पूर्वभाद्रपदाय़ोगे राजमाषान्प्रदाय़ तु |  ३१   क
सर्वभक्षफलोपेतः स वै प्रेत्य सुखी भवेत् ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति