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सभा पर्व
अध्याय ६३
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द्रौपद्यु उवाच
एकमाहुर्वैश्यवरं द्वौ तु क्षत्रस्त्रिय़ा वरौ |  ३५   क
त्रय़स्तु राज्ञो राजेन्द्र व्राह्मणस्य शतं वराः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति