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विराट पर्व
अध्याय ६३
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वैशम्पाय़न उवाच
हय़ांश्च नागांश्च रथांश्च शीघ्रं; पदातिसङ्घांश्च ततः प्रवीरान् |  १२   क
प्रस्थापय़ामास सुतस्य हेतो; र्विचित्रशस्त्राभरणोपपन्नान् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति