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विराट पर्व
अध्याय ६३
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वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञस्ततः समाचख्यौ मन्त्री विजय़मुत्तमम् |  १८   क
पराजय़ं कुरूणां चाप्युपाय़ान्तं तथोत्तरम् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति