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विराट पर्व
अध्याय ६३
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रस्थाप्य सेनां कन्याश्च गणिकाश्च स्वलङ्कृताः |  २९   क
मत्स्यराजो महाप्राज्ञः प्रहृष्ट इदमव्रवीत् |  २९   ख
अक्षानाहर सैरन्ध्रि कङ्क द्यूतं प्रवर्तताम् ||  २९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति