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वन पर्व
अध्याय १५८
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वैशम्पाय़न उवाच
शय़्यासनवरं श्रीमत्पुष्पकं विश्वकर्मणा |  ३५   क
विहितं चित्रपर्यन्तमातिष्ठत धनाधिपः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति