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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४
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व्यास उवाच
तस्यैव च समीपे स यज्ञवाटो वभूव ह |  २७   क
ईजे तत्र स धर्मात्मा विधिवत्पृथिवीपतिः |  २७   ख
मरुत्तः सहितैः सर्वैः प्रजापालैर्नराधिपः ||  २७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति