उद्योग पर्व  अध्याय ३९

विदुर उवाच

निवर्तमाने सौहार्दे प्रीतिर्नीचे प्रणश्यति |  १२   क
या चैव फलनिर्वृत्तिः सौहृदे चैव यत्सुखम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति