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वन पर्व
अध्याय १४५
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वैशम्पाय़न उवाच
सोऽभ्यगच्छन्महातेजास्तानृषीन्निय़तः शुचिः |  ३१   क
भ्रातृभिः सहितो धीमान्धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति