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अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
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व्रह्मो उवाच
ते तु लोकाः सहस्राक्ष शृणु यादृग्गुणान्विताः |  ५   क
न तत्र क्रमते कालो न जरा न च पापकम् |  ५   ख
तथान्यन्नाशुभं किञ्चिन्न व्याधिस्तत्र न क्लमः ||  ५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति