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शान्ति पर्व
अध्याय २६३
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कुण्डधार उवाच
धर्मेऽस्य रमतां वुद्धिर्धर्मं चैवोपजीवतु |  २५   क
धर्मप्रधानो भवतु ममैषोऽनुग्रहो मतः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति