शान्ति पर्व  अध्याय ६४

भीष्म उवाच

चातुराश्रम्यधर्माश्च जातिधर्माश्च पाण्डव |  १   क
लोकपालोत्तराश्चैव क्षात्रे धर्मे व्यवस्थिताः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति