शान्ति पर्व  अध्याय ६४

भीष्म उवाच

स राजा राजशार्दूल मान्धाता परमेष्ठिनः |  १२   क
जग्राह शिरसा पादौ यज्ञे विष्णोर्महात्मनः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति