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उद्योग पर्व
अध्याय ३६
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विदुर उवाच
यदि चेदप्यसम्वन्धो मित्रभावेन वर्तते |  ३६   क
स एव वन्धुस्तन्मित्रं सा गतिस्तत्पराय़णम् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति