विराट पर्व  अध्याय ६४

उत्तर उवाच

स हि भीतं द्रवन्तं मां देवपुत्रो न्यवारय़त् |  २०   क
स चातिष्ठद्रथोपस्थे वज्रहस्तनिभो युवा ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति