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भीष्म पर्व
अध्याय ६४
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भीष्म उवाच
साध्यानामपि देवानां देवदेवेश्वरः प्रभुः |  २   क
लोकभावनभावज्ञ इति त्वां नारदोऽव्रवीत् |  २   ख
भूतं भव्यं भविष्यं च मार्कण्डेय़ोऽभ्युवाच ह ||  २   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति