कर्ण पर्व  अध्याय ६४

सञ्जय़ उवाच

अथाव्रवीद्द्रोणसुतस्तवात्मजं; करं करेण प्रतिपीड्य सान्त्वय़न् |  २०   क
प्रसीद दुर्योधन शाम्य पाण्डवै; रलं विरोधेन धिगस्तु विग्रहम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति