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शल्य पर्व
अध्याय ६४
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सञ्जय़ उवाच
अद्याहं सर्वपाञ्चालान्वासुदेवस्य पश्यतः |  ३५   क
सर्वोपाय़ैर्हि नेष्यामि प्रेतराजनिवेशनम् |  ३५   ख
अनुज्ञां तु महाराज भवान्मे दातुमर्हति ||  ३५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति