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आदि पर्व
अध्याय ६५
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वैशम्पाय़न उवाच
सा तं दृष्ट्वैव राजानं दुःषन्तमसितेक्षणा |  ४   क
स्वागतं त इति क्षिप्रमुवाच प्रतिपूज्य च ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति