शान्ति पर्व  अध्याय ६५

इन्द्र उवाच

मातापित्रोर्हि कर्तव्या शुश्रूषा सर्वदस्युभिः |  १७   क
आचार्यगुरुशुश्रूषा तथैवाश्रमवासिनाम् ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति