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शान्ति पर्व
अध्याय ६५
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इन्द्र उवाच
प्रवृत्तस्य हि धर्मस्य वुद्ध्या यः स्मरते गतिम् |  ३१   क
स मे मान्यश्च पूज्यश्च तत्र क्षत्रं प्रतिष्ठितम् ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति