आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ६५

वैशम्पाय़न उवाच

उत्तरा हि प्रिय़ोक्तं वै कथय़त्यरिसूदन |  २२   क
अभिमन्योर्वचः कृष्ण प्रिय़त्वात्ते न संशय़ः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति