वन पर्व  अध्याय ९३

वैशम्पाय़न उवाच

ततो महीधरं जग्मुर्धर्मज्ञेनाभिसत्कृतम् |  ९   क
राजर्षिणा पुण्यकृता गय़ेनानुपमद्युते ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति