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वन पर्व
अध्याय ६५
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वृहदश्व उवाच
अभिज्ञाय़ सुदेवं तु दमय़न्ती युधिष्ठिर |  २९   क
पर्यपृच्छत्ततः सर्वान्क्रमेण सुहृदः स्वकान् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति