वन पर्व  अध्याय २८६

कर्ण उवाच

इष्टो भक्तश्च मे कर्णो न चान्यद्दैवतं दिवि |  ४   क
जानीत इति वै कृत्वा भगवानाह मद्धितम् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति