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विराट पर्व
अध्याय ६५
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वैशम्पाय़न उवाच
तेषु तत्रोपविष्टेषु विराटः पृथिवीपतिः |  ४   क
आजगाम सभां कर्तुं राजकार्याणि सर्वशः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति