सभा पर्व  अध्याय १४

कृष्ण उवाच

निग्राह्यलक्षणं प्राप्तो धर्मार्थनय़लक्षणैः |  १२   क
वार्हद्रथो जरासन्धस्तद्विद्धि भरतर्षभ ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति