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द्रोण पर्व
अध्याय ६५
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सञ्जय़ उवाच
ते गजा विशिखैस्तीक्ष्णैर्युधि गाण्डीवचोदितैः |  १६   क
अनेकशतसाहस्रैः सर्वाङ्गेषु समर्पिताः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति