menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय ६५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
ततो महीं सागरमेखलां त्वं; सपत्तनां ग्रामवतीं समृद्धाम् |  २१   क
प्रय़च्छ राज्ञे निहतारिसङ्घां; यशश्च पार्थातुलमाप्नुहि त्वम् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति