कर्ण पर्व  अध्याय ६५

सञ्जय़ उवाच

स चक्ररक्षानथ पादरक्षा; न्पुरःसरान्पृष्ठगोपांश्च सर्वान् |  ४२   क
दुर्योधनेनानुमतानरिघ्ना; न्समुच्चितान्सुरथान्सारभूतान् ||  ४२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति