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अनुशासन पर्व
अध्याय ११
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भीष्म उवाच
नाहं शरीरेण वसामि देवि; नैवं मय़ा शक्यमिहाभिधातुम् |  २०   क
यस्मिंस्तु भावेन वसामि पुंसि; स वर्धते धर्मय़शोर्थकामैः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति