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सभा पर्व
अध्याय ६६
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वैशम्पाय़न उवाच
व्यनदज्जातमात्रो हि गोमाय़ुरिव भारत |  ३०   क
अन्तो नूनं कुलस्यास्य कुरवस्तन्निवोधत ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति