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भीष्म पर्व
अध्याय ९८
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सञ्जय़ उवाच
न क्षत्रिय़ा रणे राजन्वर्जय़न्ति परस्परम् |  ५   क
निर्मर्यादं हि युध्यन्ते पितृभिर्भ्रातृभिः सह ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति