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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
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वैशम्पाय़न उवाच
व्याय़म्य संय़ुगे राजा दृष्ट्वा च पितरं हतम् |  ३७   क
पूर्वमेव च वाणौघैर्गाढविद्धोऽर्जुनेन सः ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति