आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७

संवर्त उवाच

सत्यमेतद्भवानाह स मां जानाति सत्रिणम् |  ४   क
कथय़स्वैतदेकं मे क्व नु सम्प्रति नारदः ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति