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द्रोण पर्व
अध्याय ६६
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अर्जुन उवाच
गुरुर्भवान्न मे शत्रुः शिष्यः पुत्रसमोऽस्मि ते |  ३३   क
न चास्ति स पुमाँल्लोके यस्त्वां युधि पराजय़ेत् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति