menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
दिवाकरेन्दुज्वलनग्रहत्विषं; सुवर्णमुक्तामणिजालभूषितम् |  १३   क
पुरन्दरार्थं तपसा प्रय़त्नतः; स्वय़ं कृतं यद्भुवनस्य सूनुना ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति