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कर्ण पर्व
अध्याय ६६
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कृष्ण उवाच
तस्मिन्मुहूर्ते दशभिः पृषत्कैः; शिलाशितैर्वर्हिणवाजितैश्च |  २५   क
विव्याध कर्णः पुरुषप्रवीरं; धनञ्जय़ं तिर्यगवेक्षमाणम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति