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कर्ण पर्व
अध्याय ६६
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कृष्ण उवाच
ततः शराणां नवतीर्नवार्जुनः; ससर्ज कर्णेऽन्तकदण्डसंनिभाः |  ३१   क
शरैर्भृशाय़स्ततनुः प्रविव्यथे; तथा यथा वज्रविदारितोऽचलः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति