शान्ति पर्व  अध्याय २००

भीष्म उवाच

एवमेष कुरुश्रेष्ठ प्रादुर्भावो महात्मनः |  ४४   क
देवदेवर्षिराचष्ट नारदः सर्वलोकदृक् ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति