आदि पर्व  अध्याय ६७

शकुन्तलो उवाच

यदि धर्मपथस्त्वेष यदि चात्मा प्रभुर्मम |  १५   क
प्रदाने पौरवश्रेष्ठ शृणु मे समय़ं प्रभो ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति