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आदि पर्व
अध्याय ६७
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कण्व उवाच
प्रसन्न एव तस्याहं त्वत्कृते वरवर्णिनि |  ३२   क
गृहाण च वरं मत्तस्तत्कृते यदभीप्सितम् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति