आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ३५

वासुदेव उवाच

इत्युक्तः स मुनिश्रेष्ठैर्यदाह प्रपितामहः |  २१   क
तत्तेऽहं सम्प्रवक्ष्यामि शृणु शिष्य यथागमम् ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति