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अनुशासन पर्व
अध्याय ६७
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व्राह्मण उवाच
यत्तत्र कृत्वा सुमहत्पुण्यं स्यात्तद्व्रवीहि मे |  १४   क
सर्वस्य हि प्रमाणं त्वं त्रैलोक्यस्यापि सत्तम ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति