सभा पर्व  अध्याय ६७

वैशम्पाय़न उवाच

उपस्तीर्णा सभा राजन्नक्षानुप्त्वा युधिष्ठिर |  २   क
एहि पाण्डव दीव्येति पिता त्वामाह भारत ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति