सभा पर्व  अध्याय ६७

शकुनिरु उवाच

अनेन व्यवसाय़ेन दीव्याम भरतर्षभ |  २०   क
समुत्क्षेपेण चैकेन वनवासाय़ भारत ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति