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विराट पर्व
अध्याय ६७
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वैशम्पाय़न उवाच
एवं व्रुवति राजेन्द्रे कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः |  १२   क
अन्वजानात्स संय़ोगं समय़े मत्स्यपार्थय़ोः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति