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विराट पर्व
अध्याय ६७
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रतिगृह्य च तां पार्थः पुरस्कृत्य जनार्दनम् |  ३४   क
विवाहं कारय़ामास सौभद्रस्य महात्मनः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति